Current Canvas, 7 नवंबर 2026: OBC क्रीमी लेयर पर फैसला, SIR मतदाता सूची, BBMB बिजली विवाद, होर्मुज़ में टैंकर और अन्य समाचार

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राजव्यवस्था, अधिकार और शासन

GS IIराजव्यवस्था और सामाजिक न्याय | आरक्षण, समानता और क्रीमी लेयर
समाचार 01

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया: OBC क्रीमी लेयर संबंधी फैसले के आधार पर पिछली नियुक्तियों की प्रक्रिया दोबारा नहीं खोली जाएगी

संक्षेप में: सर्वोच्च न्यायालय ने पहले से पूरी हो चुकी नियुक्तियों को सुरक्षित रखा, जबकि क्रीमी लेयर पर मार्च 2026 के अपने फैसले को CSE 2025 के लंबित सेवा आवंटन पर लागू किया।

Civil service probationers walking up the steps of a heritage government building
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

6 नवंबर 2026 को न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने OBC क्रीमी लेयर पर सर्वोच्च न्यायालय के 11 मार्च 2026 के फैसले के लागू होने की सीमा स्पष्ट की। उस फैसले में कहा गया था कि केवल आय ही एकमात्र मानदंड नहीं हो सकती। साथ ही, यह स्पष्ट किया गया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) और निजी क्षेत्र के पदों की सरकारी पदों के साथ समकक्षता निर्धारित नहीं होने की स्थिति में 1993 का कार्यालय ज्ञापन किस प्रकार लागू होगा। न्यायालय ने कहा कि इस फैसले के आधार पर ही 11 मार्च से पहले पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं या नियुक्तियों को दोबारा नहीं खोला जाएगा, लेकिन यह लंबित सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 के सेवा आवंटन पर लागू होगा। न्यायालय ने पदों की समकक्षता निर्धारित करने के लिए केंद्र सरकार की 2 वर्ष का समय देने की मांग अस्वीकार कर दी और अनुपालन की अवधि 2 महीने बढ़ा दी।

एक नज़र में
11 मार्च 2026फैसला: केवल आय के आधार पर क्रीमी लेयर निर्धारित नहीं की जा सकती
6 नवंबर 2026पूरी हो चुकी नियुक्तियों की प्रक्रिया दोबारा नहीं खोली जाएगी
CSE 2025लंबित सेवा आवंटन फैसले के अनुसार होगा
2 महीनेअनुपालन के लिए अतिरिक्त समय; 2 वर्ष देने का अनुरोध अस्वीकार

अवधारणा: अनुच्छेद 16(4) और OBC क्रीमी लेयर

अनुच्छेद 16(4) राज्य को उन पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी रोजगार में आरक्षण की व्यवस्था करने का अधिकार देता है, जिनका राज्य की सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने OBC आरक्षण को बरकरार रखा, लेकिन OBC वर्ग के सामाजिक और आर्थिक रूप से उन्नत सदस्यों, अर्थात क्रीमी लेयर, को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने का निर्देश दिया। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के सितंबर 1993 के कार्यालय ज्ञापन में माता-पिता की स्थिति और सेवा श्रेणी के साथ आय एवं संपत्ति की कसौटी के आधार पर क्रीमी लेयर की पहचान के मानदंड निर्धारित किए गए। इस आय एवं संपत्ति संबंधी कसौटी में वेतन और कृषि आय को शामिल नहीं किया जाता। जहाँ सरकारी क्षेत्र से बाहर के पदों की समकक्षता निर्धारित नहीं हुई थी, वहाँ आय ही निर्णायक आधार बन गई थी। मार्च 2026 के फैसले में न्यायालय ने इसी समस्या का समाधान किया।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • अनुच्छेद 16(4): पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी पदों पर आरक्षण का प्रावधान करने में राज्य को सक्षम बनाता है।
  • इंद्रा साहनी (1992): क्रीमी लेयर को बाहर रखने की शर्त के साथ 27% OBC आरक्षण को बरकरार रखा गया।
  • सितंबर 1993 का कार्यालय ज्ञापन: OBC क्रीमी लेयर की पहचान के मानदंड निर्धारित करता है।
  • आय एवं संपत्ति की कसौटी: गणना में वेतन और कृषि आय को शामिल नहीं किया जाता।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • समानता और सामाजिक न्याय: क्रीमी लेयर का सिद्धांत OBC आरक्षण के लाभ पिछड़े वर्गों के पात्र और अपेक्षाकृत कम उन्नत सदस्यों तक पहुँचाने का प्रयास करता है।
  • प्रशासनिक निश्चितता: पूरी हो चुकी नियुक्तियों को सुरक्षित रखने से केवल कानूनी व्याख्या स्पष्ट होने के कारण पहले से तय सेवा संबंधी स्थितियों में बदलाव नहीं होता।
  • वास्तविक न्यायसंगतता: CSE 2025 के लंबित सेवा आवंटन सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई कानून की व्याख्या के अनुरूप होने चाहिए।
  • नीतिगत स्पष्टता: न्यायालय ने माता-पिता की स्थिति और रोजगार श्रेणी के आकलन को आय एवं संपत्ति की अलग कसौटी से स्पष्ट रूप से अलग किया।

आगे की राह

  • पूरी हो चुकी नियुक्तियों की प्रक्रिया दोबारा खोले बिना लंबित सेवा आवंटनों में न्यायालय के निर्देश लागू किए जाएँ।
  • सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की संबंधित रोजगार श्रेणियों के लिए पदों की समकक्षता निर्धारित करने के स्पष्ट मानदंड बनाए जाएँ।
  • जिन अभ्यर्थियों के OBC गैर-क्रीमी लेयर संबंधी दावे अस्वीकार किए गए हैं, उनके लिए पारदर्शी जाँच और शिकायत निवारण प्रक्रियाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।

विषयों को आपस में जोड़ें: अनुच्छेद 14 + अनुच्छेद 16(4) + वास्तविक समानता + सकारात्मक कार्रवाई + सार्वजनिक भर्ती में प्रशासनिक निष्पक्षता।

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, “सर्वोच्च न्यायालय ने क्यों कहा कि क्रीमी लेयर संबंधी फैसले के आधार पर पिछली नियुक्तियों की प्रक्रिया दोबारा नहीं खोली जा सकती”, 6 नवंबर 2026।

GS IIराजव्यवस्था और शासन | मतदाता सूचियाँ, निर्वाचन आयोग और मतदान का अधिकार
समाचार 02

विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से बाहर हुए मतदाताओं को निर्वाचन आयोग ने एक और अवसर दिया

संक्षेप में: 7 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में प्रारूप मतदाता सूचियों से बाहर रह गए मतदाता अब नाम शामिल कराने के लिए गणना प्रपत्र दोबारा जमा कर सकते हैं।

Electoral roll registers and an inked finger at a polling help desk
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

निर्वाचन आयोग ने 7 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि (ASDD) के रूप में चिह्नित मतदाताओं को अपना नाम शामिल कराने के लिए गणना प्रपत्र दोबारा भरने की अनुमति दी है। अब उन्हें केवल फॉर्म 6 के माध्यम से आवेदन करने तक सीमित नहीं रहना होगा, जिसका उपयोग नए मतदाता पंजीकरण के लिए किया जाता है। इन मतदाताओं को प्रारूप मतदाता सूचियों से इसलिए बाहर रखा गया था क्योंकि उन्हें जारी किए गए गणना प्रपत्र भरकर वापस प्राप्त नहीं हुए थे। दोबारा प्रपत्र जमा करने से उनके मामलों पर पुनर्विचार किया जा सकेगा, लेकिन नाम स्वतः बहाल नहीं होंगे। द हिंदू ने 7 नवंबर के अपने संपादकीय में सटीक मतदाता सूचियों को कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच से जोड़ा।

एक नज़र में
ASDDअनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टियाँ
7वे राज्य और केंद्रशासित प्रदेश जहाँ SIR चल रहा है
गणना प्रपत्रनाम शामिल कराने के लिए दोबारा जमा किया जा सकता है
पुनर्विचारनाम स्वतः बहाल नहीं होते

अवधारणा: अनुच्छेद 324 और मतदाता सूची का पुनरीक्षण

अनुच्छेद 324 भारत के निर्वाचन आयोग को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान करता है। अनुच्छेद 326 संविधान और लागू कानूनों के अधीन लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं के चुनावों में वयस्क मताधिकार का प्रावधान करता है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 मतदाताओं के पंजीकरण तथा मतदाता सूचियों की तैयारी और पुनरीक्षण को नियंत्रित करता है। धारा 21 मतदाता सूचियों की तैयारी और पुनरीक्षण से संबंधित है। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और बूथ स्तर अधिकारी (BLO) इस प्रक्रिया में निर्धारित भूमिकाएँ निभाते हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पात्र मतदाताओं की पहचान, कानूनी रूप से अमान्य प्रविष्टियों को हटाना तथा दावों और सुधारों के लिए सुलभ प्रक्रियाएँ उपलब्ध कराना आवश्यक है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • अनुच्छेद 324: निर्वाचन आयोग के संवैधानिक अधिकार का आधार।
  • अनुच्छेद 326: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों में वयस्क मताधिकार।
  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950: मतदाता सूचियों और मतदाताओं के पंजीकरण से संबंधित कानून।
  • फॉर्म 6: मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन। ASDD श्रेणी के मतदाता गणना प्रपत्र भी दोबारा जमा कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • मतदाता समावेशन: किसी पात्र मतदाता को गलत तरीके से सूची से बाहर करने पर वह अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने से वंचित हो सकता है।
  • चुनावी शुचिता: दोहरी और अमान्य प्रविष्टियों का भी उचित सत्यापन आवश्यक है।
  • प्रशासनिक जवाबदेही: गणना संबंधी अभिलेख और मतदाताओं को सूची से बाहर रखने के कारण पारदर्शी होने चाहिए तथा उनमें सुधार की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • डिजिटल सुगम्यता: ऑनलाइन प्रक्रियाएँ सुविधा बढ़ा सकती हैं, लेकिन सीमित डिजिटल पहुँच वाले नागरिकों के लिए ऑफलाइन सहायता भी महत्त्वपूर्ण है।

आगे की राह

  • बूथ स्तर अधिकारियों द्वारा सक्रिय संपर्क और दावे प्रस्तुत करने की सुलभ प्रक्रियाएँ सुनिश्चित की जाएँ।
  • मतदाता सूची से बाहर रखने के स्पष्ट कारण बताए जाएँ और सुधार के लिए व्यावहारिक अवसर दिए जाएँ।
  • प्रक्रियागत आवश्यकताओं को अनुपातहीन रूप से बोझिल बनाए बिना सत्यापन, अपील और निगरानी की व्यवस्था मजबूत की जाए।

विषयों को आपस में जोड़ें: अनुच्छेद 324 + सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार + चुनावी शुचिता + प्रशासनिक जवाबदेही + डिजिटल समावेशन।

स्रोत: द हिंदू, SIR की प्रारूप मतदाता सूचियों से बाहर रह गए मतदाताओं को नए अवसर दिए जाने संबंधी रिपोर्ट, 7 नवंबर 2026। द हिंदू, मतदाता सूचियों और कल्याणकारी योजनाओं पर संपादकीय, 7 नवंबर 2026।

GS IIराजव्यवस्था और शासन | संघवाद और अंतर-राज्यीय संसाधन विवाद
समाचार 03

सर्वोच्च न्यायालय ने BBMB बिजली विवाद सुलझाया: पंजाब और हरियाणा 20 वर्षों में हिमाचल प्रदेश को 11,973 MU बिजली देंगे

संक्षेप में: सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश के लिए 20 वर्ष की बिजली आपूर्ति व्यवस्था निर्धारित करके BBMB से जुड़े लंबे समय से चल रहे बिजली विवाद का समाधान किया।

Bhakra Dam and power transmission towers
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

6 नवंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 1966 से भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की परियोजनाओं से हिमाचल प्रदेश को देय हिस्से से संबंधित दशकों पुराने विवाद का निपटारा किया। पीठ ने केंद्र सरकार के नकदरहित समाधान के प्रस्ताव को स्वीकार किया। इसके तहत पंजाब और हरियाणा अगले 20 वर्षों में हिमाचल प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट (MU) बिजली देंगे, यानी लगभग 598 MU प्रतिवर्ष। यह व्यवस्था सर्वोच्च न्यायालय के 2011 के उस फैसले को लागू करती है, जिसमें हिमाचल प्रदेश का हिस्सा 7.19% निर्धारित किया गया था। ऐतिहासिक पूंजीगत लागत के मद में हिमाचल प्रदेश की लगभग ₹420 करोड़ की देनदारी का समायोजन नकद भुगतान के बजाय बिजली के रूप में किया जाएगा।

एक नज़र में
11,973 MUहिमाचल प्रदेश को देय बिजली
20 वर्षबकाया चुकाने की अवधि, लगभग 598 MU प्रति वर्ष
7.19%2011 में निर्धारित हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी
लगभग ₹420 करोड़पूंजीगत लागत की देनदारी का समायोजन नकद के बजाय बिजली के रूप में

अवधारणा: BBMB और अंतर-राज्यीय बिजली साझेदारी की व्यवस्थाएँ

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं से संबंधित प्रमुख जलविद्युत एवं अन्य बुनियादी ढाँचे का प्रबंधन करता है। पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 पंजाब के पुनर्गठन के बाद बनी संस्थागत और संसाधन साझेदारी की व्यवस्थाओं को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण है। साझा बुनियादी ढाँचे से उत्पन्न बिजली के अधिकार, लागत और वितरण को लेकर राज्यों के बीच विवाद हो सकते हैं। ऐसे विवादों के समाधान के लिए कानून की व्याख्या, सरकारों के बीच बातचीत और न्यायिक आदेशों के क्रियान्वयन की आवश्यकता पड़ सकती है। अनुच्छेद 131 संघ और राज्यों से जुड़े कुछ निर्धारित कानूनी विवादों पर सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकारिता प्रदान करता है। यह अनुच्छेद 262 से अलग है, जो विशेष रूप से अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों से संबंधित है।

Locator map: Bhakra and Pong dams, with Himachal Pradesh, Punjab and Haryana
हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के साथ भाखड़ा और पोंग बाँध। स्थिति दर्शाने वाला मानचित्र, वास्तविक मापानुपात में नहीं। भारत की सीमाएँ आधिकारिक मानचित्रों के अनुसार।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • BBMB भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं का प्रबंधन करता है; इसकी स्थापना पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत हुई।
  • 2011 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित हिमाचल प्रदेश का हिस्सा: 7.19%।
  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) का मूल हकदारी अनुमान: 13,066 MU।
  • हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी भाखड़ा (1966), देहर (1977) और पोंग बाँध (1978) से संबंधित है।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • सहकारी संघवाद: साझा बुनियादी ढाँचे के लिए संसाधन आवंटन के स्पष्ट सिद्धांत और निरंतर समन्वय आवश्यक हैं।
  • न्यायिक प्रवर्तन: न्यायालय का आदेश पिछली कार्यवाहियों में पहले ही मान्यता प्राप्त अधिकार को लागू करने से संबंधित है।
  • ऊर्जा सुरक्षा: बिजली का आवंटन पड़ोसी राज्यों की योजना निर्माण और आपूर्ति व्यवस्थाओं को प्रभावित करता है।
  • न्यायसंगत समाधान: बिजली के रूप में बकाया चुकाने की व्यवस्था से अनुपालन की प्रक्रिया समय के साथ पूरी होती है और लाभार्थी राज्य का मान्यता प्राप्त अधिकार भी सुरक्षित रहता है।

आगे की राह

  • आपूर्ति की गई बिजली के वार्षिक सत्यापन के साथ क्रियान्वयन की पारदर्शी समय-सारणी तैयार की जाए।
  • BBMB द्वारा बिजली के आवंटन, शुल्क और बकाया दायित्वों का विश्वसनीय लेखा-जोखा सुनिश्चित किया जाए।
  • संसाधन साझेदारी संबंधी मतभेदों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया तक पहुँचने से पहले सुलझाने के लिए अंतर-राज्यीय तंत्र मजबूत किए जाएँ।

विषयों को आपस में जोड़ें: पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 + अनुच्छेद 131 + सहकारी संघवाद + जलविद्युत + अंतर-राज्यीय संसाधन साझेदारी।

स्रोत: द हिंदू, “सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दशकों पुराना बिजली विवाद सुलझाए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश को पंजाब और हरियाणा से 11,973 MU बिजली मिलेगी”, 6 नवंबर 2026। लाइव लॉ, “सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब और हरियाणा को 20 वर्षों में हिमाचल प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बकाया बिजली देने का निर्देश दिया”, 6 नवंबर 2026।

सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य

GS IIसामाजिक न्याय | श्रम की गरिमा, सफाई कर्मचारी और कानूनी सुरक्षा उपाय
समाचार 04

सीवर की सफाई के दौरान मौतों से भारत के प्रतिबंधात्मक कानून के क्रियान्वयन में बनी हुई कमियाँ उजागर

संक्षेप में: खतरनाक सीवर सफाई के दौरान हुई मौतों के आधिकारिक आँकड़े 2013 के कानून और सर्वोच्च न्यायालय के सुरक्षा संबंधी निर्देशों को लागू करने के महत्त्व को रेखांकित करते हैं।

A mechanised sewer-cleaning machine beside an open manhole
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

6 नवंबर 2026 को द हिंदू में प्रकाशित एक संपादकीय ने बताया कि कानून, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और मशीनीकृत तकनीक की उपलब्धता के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंकों में सफाई कर्मचारियों की मौतें जारी हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक होटल के खाद्य अपशिष्ट वाले चैंबर की सफाई करते समय 4 कर्मचारियों की मौत हुई। समाचारपत्र द्वारा उद्धृत संसद और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के आँकड़ों के अनुसार 2021-26 के दौरान 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 332 मौतें हुईं, जबकि 2014 से 2025 के बीच 859 और 1993 से 2025 के बीच 1,350 मौतें दर्ज की गईं। 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रत्येक मृत्यु के लिए मुआवजे की राशि बढ़ाकर ₹30 लाख कर दी।

एक नज़र में
3322021-26 में 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मौतें
8592014 से 2025 के बीच मौतें
₹30 लाखप्रत्येक मृत्यु पर मुआवजा (सर्वोच्च न्यायालय, 2023)
धारा 7खतरनाक तरीके से सीवर की सफाई कराने पर प्रतिबंध

अवधारणा: हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम (PEMSR), 2013 तथा गरिमा का अधिकार

हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 हाथ से मैला उठाने और सीवर तथा सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई पर प्रतिबंध लगाता है। 2013 से इस कानून में इन दोनों गतिविधियों को अलग-अलग माना गया है। धारा 7 किसी भी व्यक्ति को खतरनाक सीवर सफाई के लिए नियोजित करने पर रोक लगाती है, जबकि धारा 33 स्थानीय प्राधिकरणों को आधुनिक तकनीक का उपयोग करने का निर्देश देती है। सफाई कर्मचारी आंदोलन (2014) और डॉ. बलराम सिंह (2023) मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने मुआवजे, पुनर्वास और ठेके पर काम कराने की व्यवस्था के माध्यम से कर्मचारियों को सीवर में उतारने की प्रथा समाप्त करने के निर्देश दिए। नमस्ते योजना (NAMASTE) का उद्देश्य सफाई कार्यों का मशीनीकरण करना है। अनुच्छेद 17, 21 और 23 गरिमा की रक्षा तथा शोषण से सुरक्षा का संवैधानिक आधार प्रदान करते हैं।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • PEMSR अधिनियम, 2013: हाथ से मैला उठाने तथा सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई पर प्रतिबंध लगाता है।
  • डॉ. बलराम सिंह बनाम भारत संघ (2023): सीवर में प्रत्येक मृत्यु के लिए ₹30 लाख मुआवजा।
  • नमस्ते (NAMASTE): मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना (National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem)।
  • उद्धृत आँकड़े: 2021-26 के दौरान 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 332 मौतें।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • गरिमा का अधिकार: खतरनाक सफाई कार्य समानता, व्यावसायिक सुरक्षा और सामाजिक बहिष्करण से जुड़े संवैधानिक प्रश्न उठाते हैं।
  • क्रियान्वयन में कमी: दर्ज की गई मौतें दर्शाती हैं कि केवल कानूनी प्रतिबंध से कानून का पालन सुनिश्चित नहीं होता।
  • ठेका व्यवस्था में जवाबदेही: नगर निकायों और ठेका एजेंसियों को उपठेका व्यवस्था के माध्यम से असुरक्षित कार्यप्रथाएँ जारी नहीं रहने देनी चाहिए।
  • पुनर्वास: मुआवजा मौतों और दुर्घटनाओं के परिणामों की भरपाई का उपाय है, जबकि टिकाऊ आजीविका, कौशल विकास और मशीनीकरण मूल जोखिमों को कम करने के उपाय हैं।

आगे की राह

  • खतरनाक परिस्थितियों में कर्मचारियों के सीवर में उतरने के स्थान पर मशीनों से सफाई की जाए। इसके लिए उपकरण, प्रशिक्षित कर्मचारी और आपातकालीन कार्यप्रणाली उपलब्ध कराई जाए।
  • सफाई कर्मचारियों के रोजगार को औपचारिक व्यवस्था के अंतर्गत लाया जाए, प्रत्येक मृत्यु के मामले में FIR दर्ज की जाए और समय पर मुआवजा दिया जाए।
  • पुनर्वास, वैकल्पिक आजीविका और सफाई ठेकेदारों की स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित की जाए।

विषयों को आपस में जोड़ें: अनुच्छेद 17 + अनुच्छेद 21 + अनुच्छेद 23 + सामाजिक बहिष्करण + शहरी स्थानीय शासन + व्यावसायिक सुरक्षा।

स्रोत: द हिंदू, “सीवर में खतरा: भारत में सीवर सफाई के दौरान होने वाली मौतों पर”, नवंबर 2026।

GS IIसामाजिक न्याय और स्वास्थ्य | सस्ती दवाएँ, कैंसर का उपचार और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था
समाचार 05

कैंसर की दवाओं पर व्यापार मार्जिन 30% तक सीमित, लेकिन विशेषज्ञों का सवाल: क्या कम MRP से इलाज सुलभ होगा? कर्नाटक की महिलाओं में फेफड़ों का कैंसर अधिक तेजी से बढ़ रहा है

संक्षेप में: 137 कैंसर-रोधी दवाओं के व्यापारिक मार्जिन पर सीमा लगाने से 9 नवंबर से उनकी कीमतें कम होंगी, लेकिन दवाएं कैंसर उपचार की कुल लागत का केवल एक हिस्सा हैं।

An IV drip and medicine vials in an oncology day-care ward
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं के व्यापारिक मार्जिन की अधिकतम सीमा 30% निर्धारित की है। संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। द हिंदू के अनुसार, लगभग 900 ब्रांडों की कीमतों में 70% से 93% तक की कटौती दर्ज की गई है। 6 नवंबर को समाचारपत्र में प्रकाशित एक परिचर्चा में विशेषज्ञों ने सवाल उठाया कि क्या केवल दवाओं की कीमतें घटाने से कैंसर उपचार वहनीय हो जाएगा। अलग से, किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी के आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर की आयु-समायोजित दर में औसतन 4.8% की वार्षिक वृद्धि हुई है, जबकि पुरुषों में यह वृद्धि 1.6% रही। हालांकि, फेफड़ों के कैंसर का कुल बोझ अब भी पुरुषों में अधिक है।

एक नज़र में
137व्यापार मार्जिन की सीमा के अंतर्गत आने वाली कैंसर-रोधी दवाएँ
30%अधिकतम व्यापार मार्जिन
9 नवंबरसंशोधित कीमतें लागू होंगी
4.8% बनाम 1.6%फेफड़ों के कैंसर की दर में वार्षिक वृद्धि: महिलाएँ बनाम पुरुष (कर्नाटक)

अवधारणा: NPPA, DPCO 2013 और व्यापार मार्जिन का युक्तिकरण

औषध विभाग के अधीन राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA), आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत जारी औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (DPCO) के माध्यम से दवाओं की कीमतों को विनियमित करता है। राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची में शामिल अनुसूचित दवाओं पर अधिसूचित अधिकतम मूल्य लागू होते हैं। गैर-अनुसूचित दवाओं पर सामान्यतः मूल्य निगरानी के अलग नियम लागू होते हैं। DPCO, 2013 का पैरा 19 जनहित में असाधारण परिस्थितियों में मूल्य संबंधी हस्तक्षेप की अनुमति देता है। व्यापार मार्जिन युक्तिकरण वितरण और खुदरा बिक्री शृंखला में रखे जाने वाले मार्जिन को सीमित करता है। अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में कमी से अनुमत बिक्री मूल्य घटता है, लेकिन इससे कैंसर के इलाज की कुल लागत का आकलन नहीं होता।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • NPPA: औषध विभाग के अधीन; औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 को लागू करता है।
  • DPCO, 2013 आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत जारी किया गया है।
  • व्यापार मार्जिन की सीमा: 137 गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं पर 30%।
  • कर्नाटक में फेफड़ों के कैंसर की प्रवृत्ति (KMIO): महिलाओं में प्रतिवर्ष +4.8%, पुरुषों में +1.6%।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • दवाओं की वहनीयता: व्यापार मार्जिन का विनियमन कुछ महँगी दवाओं सहित अन्य दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य को कम कर सकता है।
  • इलाज की कुल लागत: कैंसर के उपचार पर होने वाले खर्च में जाँच, शल्य चिकित्सा, अस्पताल में भर्ती, विकिरण चिकित्सा, यात्रा और उपचार के बाद की देखभाल भी शामिल हैं।
  • न्यायसंगत पहुँच: उपचार की वहनीयता उसकी उपलब्धता, वित्तीय सुरक्षा और प्रभावी ढंग से कार्यरत सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर करती है।
  • लैंगिक संवेदनशीलता वाली कैंसर देखभाल: कैंसर रजिस्ट्रियों को किसी एक कारण को जिम्मेदार माने बिना महिलाओं और पुरुषों में रोग की घटनाओं, निदान और उपचार के परिणामों के अंतर का अध्ययन करना चाहिए।

आगे की राह

  • निगरानी की जाए कि संशोधित कीमतों का लाभ वास्तव में दवा दुकानों और अस्पतालों में मरीजों तक पहुँच रहा है।
  • सार्वजनिक कैंसर उपचार सेवाओं, मानक उपचार प्रोटोकॉल और वित्तीय सुरक्षा को मजबूत किया जाए।
  • उच्च गुणवत्ता वाली जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियों का विस्तार किया जाए और महिलाओं तथा पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर की अलग-अलग प्रवृत्तियों पर अनुसंधान बढ़ाया जाए।

विषयों को आपस में जोड़ें: DPCO 2013 + आवश्यक वस्तु अधिनियम + सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज + लैंगिक संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा + कैंसर निगरानी।

स्रोत: द हिंदू, “क्या कैंसर की दवाओं के कम MRP से इलाज अधिक वहनीय हो रहा है?”, नवंबर 2026। द हिंदू, “कर्नाटक में महिलाओं के बीच फेफड़ों का कैंसर अधिक तेजी से बढ़ रहा है”, 7 नवंबर 2026।

अंतरराष्ट्रीय संबंध

GS IIअंतरराष्ट्रीय संबंध | पश्चिम एशिया, समुद्री सुरक्षा और भारत के ऊर्जा हित
समाचार 06

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का दावा: होर्मुज़ जलडमरूमध्य में टैंकर बारूदी सुरंगों से टकराए; खाड़ी क्षेत्र में अलग हमले में एक नाविक की मौत

संक्षेप में: होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट समुद्री घटनाओं की खबरें तेल और गैस परिवहन के एक प्रमुख समुद्री मार्ग के सुरक्षा संबंधी महत्त्व को रेखांकित करती हैं।

An oil tanker in the Strait of Hormuz
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

6 नवंबर 2026 को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में और उसके निकट 2 तेल टैंकर बारूदी सुरंगों से टकराने के बाद आग की चपेट में आ गए। IRGC के अनुसार, ये टैंकर ऐसे मार्ग का उपयोग कर रहे थे जिसे उसने अनधिकृत बताया। इससे 1 दिन पहले ईरानी मीडिया ने 5 तेल टैंकरों और 1 टगबोट में आग लगने की खबर दी थी। समुद्री अधिकारियों ने इन घटनाओं की पुष्टि नहीं की है। एक अलग घटना में, खाड़ी क्षेत्र में ग्रीक स्वामित्व वाले और मार्शल द्वीपसमूह के ध्वज वाले टैंकर वेलोस सैफायर पर एक प्रक्षेप्य के टकराने से 1 नाविक की मृत्यु हो गई। 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान इस जलडमरूमध्य से होने वाले आवागमन को सीमित करने का प्रयास कर रहा है।

एक नज़र में
लगभग 1/5वैश्विक तेल खपत का वह हिस्सा जो सामान्यतः इस मार्ग से गुजरता है
2 तेल टैंकर6 नवंबर को आग लगने की सूचना (IRGC का दावा)
अपुष्टसमुद्री अधिकारियों से कोई पुष्टि नहीं
1 नाविकवेलोस सैफायर पर मृत्यु

अवधारणा: होर्मुज जलडमरूमध्य और भारत की ऊर्जा सुरक्षा

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान स्थित हैं, जिसमें मुसंदम प्रायद्वीप भी शामिल है। यह समुद्री मार्ग कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के अंतरराष्ट्रीय परिवहन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसकी सुरक्षा जहाजों की उपलब्धता, माल ढुलाई शुल्क, बीमा प्रीमियम और अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों के माध्यम से ऊर्जा आयातक अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करती है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा विश्वसनीय आयात, आपूर्तिकर्ताओं के विविधीकरण, सुचारु समुद्री मार्गों और संभावित आपूर्ति व्यवधानों से निपटने के घरेलू उपायों पर निर्भर करती है।

Locator map: The Strait of Hormuz between the Persian Gulf and the Gulf of Oman
फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य। स्थिति दर्शाने वाला मानचित्र, पैमाने के अनुसार नहीं। भारत की सीमाएँ आधिकारिक मानचित्रों के अनुसार हैं।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • होर्मुज जलडमरूमध्य: फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है; ईरान और ओमान (मुसंदम) के बीच स्थित है।
  • सामान्यतः वैश्विक तेल खपत के लगभग 1/5 हिस्से का परिवहन इस मार्ग से होता है।
  • IRGC: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, ईरान की सैन्य व्यवस्था का वैचारिक अंग।
  • UKMTO: यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस, समुद्र में होने वाली घटनाओं पर निगरानी रखने वाली ब्रिटिश समुद्री एजेंसी।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • ऊर्जा आयात संबंधी संवेदनशीलता: प्रमुख समुद्री परिवहन मार्गों में व्यवधान आयातित ईंधन की लागत और आपूर्ति की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
  • समुद्री सुरक्षा: जहाजों की सुरक्षा नौवहन समन्वय, सुरक्षा संबंधी सूचनाओं और वाणिज्यिक जहाजों के संरक्षण पर निर्भर करती है।
  • आर्थिक प्रभाव का प्रसार: किसी समुद्री मार्ग के पूरी तरह बंद हुए बिना भी परिवहन संबंधी जोखिम माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ा सकता है।
  • रणनीतिक कूटनीति: ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं के साथ स्थिर संबंध बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता सुरक्षित रखना भारत के हित में है।

आगे की राह

  • ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाई जाए और पर्याप्त रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाए रखे जाएँ।
  • समुद्री सूचनाओं के आदान-प्रदान और वाणिज्यिक जहाजों से जुड़े जोखिमों की निगरानी को मजबूत किया जाए।
  • कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम करने तथा नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों का समर्थन किया जाए।

विषयों को आपस में जोड़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य + भारत का कच्चे तेल और LNG का आयात + समुद्री सुरक्षा + भुगतान संतुलन + रणनीतिक भंडार।

स्रोत: द हिंदू, “ईरानी गार्ड्स के अनुसार होर्मुज में 2 टैंकरों में आग लगी”, 6-7 नवंबर 2026। द हिंदू, “खाड़ी में नाविक की मृत्यु, ईरान ने टैंकरों में आग लगने की बात कही”, 7 नवंबर 2026।

अर्थव्यवस्था, खाद्य और ऊर्जा

GS IIIभारतीय अर्थव्यवस्था | खाद्य सुरक्षा, मूल्य स्थिरता और आवश्यक वस्तुओं का विनियमन
समाचार 07

कीमतों को लेकर चिंता के बीच केंद्र ने चावल और धान के भंडार की घोषणा अनिवार्य की

संक्षेप में: सरकार ने चावल और धान के भंडार की साप्ताहिक घोषणा अनिवार्य कर दी है और आवश्यकतानुसार 5 दक्षिणी राज्यों को भंडारण सीमा लागू करने की अनुमति दी है।

Rice sacks and paddy in a government grain warehouse
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

6 नवंबर 2026 के एक आदेश के अंतर्गत सभी व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़ी खुदरा शृंखलाओं, प्रसंस्करण इकाइयों और मिल संचालकों को प्रत्येक शुक्रवार खाद्य भंडार पोर्टल पर 6 श्रेणियों में चावल और धान के भंडार की घोषणा करनी होगी। केंद्र ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को 31 जनवरी 2027 तक भंडारण सीमा लागू करने की भी अनुमति दी है। इसके अतिरिक्त, खुले बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के अंतर्गत 2026-27 के लिए चावल बिक्री का लक्ष्य 25 लाख टन से दोगुना करके 50 लाख टन कर दिया गया है। अपर्याप्त और असमान मानसून के बाद खुदरा चावल मुद्रास्फीति अगस्त के 5.89% से बढ़कर सितंबर में 8.25% हो गई।

एक नज़र में
प्रत्येक शुक्रवारखाद्य भंडार पोर्टल पर भंडार की घोषणा
5 राज्य31 जनवरी 2027 तक भंडारण सीमा लगाने की अनुमति
50 लाख टनOMSS के अंतर्गत चावल बिक्री का लक्ष्य दोगुना
8.25%सितंबर में खुदरा चावल मुद्रास्फीति

अवधारणा: आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और खाद्य कीमतों का प्रबंधन

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 सरकार को कानूनी रूप से अनुमत परिस्थितियों में निर्दिष्ट आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और व्यापार को विनियमित करने का अधिकार देता है। धारा 3 नियंत्रण संबंधी आदेश जारी करने के लिए प्रमुख प्रावधान है, जबकि धाराएँ 6 और 7 प्रवर्तन से जुड़े परिणामों और दंड का प्रावधान करती हैं। भंडार की घोषणा से अधिकारियों को बाजार में वस्तुओं की उपलब्धता का आकलन करने और असामान्य भंडारण की पहचान करने में सहायता मिलती है। जहाँ कानूनी रूप से भंडारण सीमाएँ लगाई जाती हैं, वहाँ वे निर्दिष्ट संस्थाओं द्वारा रखी जा सकने वाली मात्रा को सीमित करती हैं। खुले बाजार बिक्री योजना (OMSS) के अंतर्गत भारतीय खाद्य निगम (FCI) निर्धारित व्यवस्थाओं के माध्यम से खाद्यान्न बाजार में उपलब्ध कराता है। ये उपाय सरकारी खरीद, बफर स्टॉक और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के पूरक हैं।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • आवश्यक वस्तु अधिनियम: 1955; धारा 3 आवश्यक वस्तुओं को नियंत्रित करने की शक्ति से संबंधित है।
  • अनिवार्य भंडार रिपोर्टिंग: प्रत्येक शुक्रवार खाद्य भंडार पोर्टल पर।
  • 6 श्रेणियाँ: बासमती, गैर-बासमती प्रीमियम, गैर-बासमती, उसना चावल, टूटे चावल और धान।
  • वित्त वर्ष 2026-27 के लिए संशोधित OMSS चावल बिक्री लक्ष्य: 50 लाख मीट्रिक टन।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • मूल्य स्थिरता: कीमतें बढ़ने के दौरान भंडार का खुलासा नियामक संस्थाओं के पास उपलब्ध जानकारी को बेहतर बना सकता है।
  • खाद्य सुरक्षा: सरकारी भंडार से बाजार में खाद्यान्न जारी करने से उपलब्धता बढ़ सकती है और स्थानीय कमी को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।
  • संघीय समन्वय: केंद्र की सहमति निर्दिष्ट राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार भंडारण सीमाओं पर विचार करने की अनुमति देती है।
  • बाजार दक्षता: अत्यधिक कठोर या अप्रत्याशित नियंत्रण वैध व्यापार और भंडारण को हतोत्साहित कर सकते हैं।

आगे की राह

  • विश्वसनीय और नियमित रूप से अद्यतन आँकड़ों के आधार पर कीमतों, बाजार में आवक और भंडार घोषणाओं की निगरानी की जाए।
  • भंडारण सीमाएँ पारदर्शी और अनुपातिक तरीके से तथा केवल कानूनी रूप से उचित परिस्थितियों में लागू की जाएँ।
  • क्षेत्रीय मूल्य अंतर कम करने के लिए भंडारण, परिवहन और वितरण नेटवर्क में सुधार किया जाए।

विषयों को आपस में जोड़ें: आवश्यक वस्तु अधिनियम + FCI + OMSS + मुद्रास्फीति प्रबंधन + कृषि बाजार + सहकारी संघवाद।

स्रोत: द हिंदू, “कीमतों में वृद्धि के बीच केंद्र ने चावल और धान के भंडार की घोषणा अनिवार्य की”, 7 नवंबर 2026। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, पत्र सूचना कार्यालय (PIB), “सरकार ने OMSS (D) के अंतर्गत चावल बिक्री का लक्ष्य दोगुना किया…”, 6 नवंबर 2026।

GS IIIपर्यावरण और ऊर्जा | जैव ईंधन, ऊर्जा संक्रमण और ईंधन गुणवत्ता विनियमन
समाचार 08

कर्नाटक के अनुसार, E20 के मानक के मुकाबले पेट्रोल के नमूनों में 31.2% तक एथेनॉल मिला; पहली छमाही में संपीडित बायोगैस का मिश्रण 1.7% रहा

संक्षेप में: कर्नाटक में पेट्रोल के कुछ नमूनों में E20 मिश्रण की निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल होने की सूचना मिली है, जबकि भारत में संपीड़ित बायोगैस का मिश्रण वार्षिक लक्ष्य से नीचे रहा।

A fuel nozzle with sugarcane, maize and a beaker of ethanol
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

6 नवंबर 2026 को कर्नाटक के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने कहा कि राज्य के विधिक मापविज्ञान विभाग द्वारा बेंगलुरु शहरी, कोलार, तुमकुरु और दक्षिण कन्नड़ सहित विभिन्न जिलों से लिए गए पेट्रोल के नमूनों में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20% से काफी अधिक पाई गई। कुछ मामलों में यह 31.2% तक थी। ये राज्य सरकार द्वारा सीमित नमूनों की जांच के आधार पर निकाले गए निष्कर्ष हैं। खबरों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने जांच की पद्धति पर आपत्ति जताई है। अलग से, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (PNGRB) ने बताया कि अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान संपीडित प्राकृतिक गैस (CNG) और पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस (PNG) में संपीडित बायोगैस (CBG) का मिश्रण 1.7% तक पहुंचा, जबकि वर्ष के लिए लक्ष्य 3% है।

एक नज़र में
20%E20 पेट्रोल में निर्धारित एथेनॉल की मात्रा
31.2%कर्नाटक के नमूनों में बताई गई अधिकतम मात्रा
1.7%CBG मिश्रण, अप्रैल-सितंबर 2026
3%2026-27 के लिए CBG मिश्रण का लक्ष्य

अवधारणा: E20, राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और CBG मिश्रण

E20 ऐसा पेट्रोल है जिसमें आयतन के आधार पर 20% एथेनॉल होता है और शेष भाग मुख्यतः पेट्रोल होता है। भारत की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018 में 2022 के संशोधन द्वारा राष्ट्रीय E20 लक्ष्य को आगे बढ़ाकर एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 कर दिया गया। संपीड़ित बायोगैस (CBG) कृषि अवशेषों, पशु अपशिष्ट और अन्य जैव-अपघटनीय कचरे जैसे जैविक पदार्थों से उत्पादित बायोगैस को शुद्ध करके बनाई जाती है। उपयुक्त उपयोगों में यह पारंपरिक प्राकृतिक गैस का विकल्प बन सकती है। सरकार का संपीड़ित बायोगैस मिश्रण दायित्व परिवहन के लिए CNG और घरेलू पाइप्ड प्राकृतिक गैस पर लागू होता है। मिश्रण के लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3%, वित्त वर्ष 2027-28 के लिए 4% और वित्त वर्ष 2028-29 से 5% हैं।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • E20: आयतन के आधार पर 20% एथेनॉल युक्त पेट्रोल।
  • राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018 (2022 में संशोधित) ने E20 का लक्ष्य आगे बढ़ाकर 2025-26 कर दिया।
  • CBG मिश्रण दायित्व: 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4%, 2028-29 में 5%।
  • PNGRB: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • ऊर्जा सुरक्षा: घरेलू जैव ईंधन पारंपरिक जीवाश्म ईंधन की खपत के एक हिस्से का विकल्प बन सकते हैं।
  • ईंधन मानक: मिश्रण कार्यक्रमों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण, विश्वसनीय प्रयोगशाला परीक्षण और वाहनों की तकनीकी विशिष्टताओं के साथ अनुकूलता आवश्यक है।
  • अपशिष्ट से ऊर्जा: CBG जैविक कचरे और कृषि अवशेषों के उत्पादक उपयोग का अवसर प्रदान करती है।
  • अवसंरचना संबंधी बाधा: पाइपलाइन नेटवर्क से अपर्याप्त जुड़ाव CBG संयंत्रों के व्यावसायिक उपयोग को सीमित कर सकता है।

आगे की राह

  • स्वतंत्र ईंधन नमूना परीक्षण, गुणवत्ता आश्वासन और लागू मानकों के पारदर्शी प्रवर्तन को मजबूत किया जाए।
  • CBG संयंत्रों को शहरी गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था बेहतर की जाए और उत्पादित गैस की विश्वसनीय खरीद के प्रबंधों को समर्थन दिया जाए।
  • वैज्ञानिक परीक्षणों के माध्यम से उपभोक्ता संरक्षण, वाहनों की अनुकूलता और पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किया जाए।

विषयों को आपस में जोड़ें: राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति + E20 + CBG मिश्रण + चक्रीय अर्थव्यवस्था + ऊर्जा सुरक्षा + उपभोक्ता संरक्षण।

स्रोत: द हिंदू, कर्नाटक में पेट्रोल के एथेनॉल परीक्षणों पर रिपोर्ट, 6 नवंबर 2026। द हिंदू, “पहली छमाही में CBG मिश्रण 1.7%; 3% का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए पाइपलाइन संपर्क महत्त्वपूर्ण”, नवंबर 2026। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, PIB, राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति में संशोधन, 18 मई 2022। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, PIB, संपीड़ित बायोगैस मिश्रण दायित्व, 2023।

GS IIIभारतीय अर्थव्यवस्था | खनिज संसाधन, औद्योगिक नीति और रणनीतिक आपूर्ति शृंखलाएँ
समाचार 09

खान मंत्रालय ने 20 महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की पेशकश करते हुए नीलामी का 9वाँ चरण शुरू किया

संक्षेप में: केंद्र ने 20 महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों को नीलामी के लिए प्रस्तुत किया है। इसके अतिरिक्त, अन्वेषण लाइसेंस के लिए 11 ब्लॉक भी नीलामी में रखे गए हैं।

An open-cast mine and mineral ore samples
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

5 नवंबर 2026 को खान मंत्रालय ने महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी का 9वाँ चरण शुरू किया, जिसमें 20 ब्लॉक शामिल हैं। साथ ही, अन्वेषण लाइसेंस की नीलामी का 3रा चरण भी शुरू किया गया, जिसमें 11 ब्लॉक शामिल हैं। इन ब्लॉकों में ग्रेफाइट, ग्लॉकोनाइट, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, दुर्लभ मृदा तत्व, टंगस्टन, पोटाश और हैलाइट के निक्षेप शामिल हैं। महत्त्वपूर्ण खनिज बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक हैं। इन नीलामियों का उद्देश्य घरेलू खनिज अन्वेषण और आपूर्ति बढ़ाना है।

एक नज़र में
20महत्त्वपूर्ण खनिज ब्लॉक, 9वाँ चरण
11अन्वेषण लाइसेंस ब्लॉक, 3रा चरण
दुर्लभ मृदा तत्व (REE), गैलियम, ग्रेफाइटनीलामी के लिए प्रस्तुत खनिजों में शामिल
खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR)महत्त्वपूर्ण खनिजों के लिए 2023 में संशोधित

अवधारणा: MMDR अधिनियम और महत्त्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा

खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR अधिनियम) भारत में खनिज विकास और खनन के विनियमन का प्रमुख कानून है। 2023 के संशोधनों ने महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के लिए कानूनी ढाँचे को मजबूत किया, जिसमें निर्दिष्ट खनिज ब्लॉकों की केंद्रीय नीलामी भी शामिल है। धारा 10BA सातवीं अनुसूची में सूचीबद्ध महत्त्वपूर्ण और गहराई में स्थित खनिजों के लिए अन्वेषण लाइसेंस का प्रावधान करती है। अन्वेषण लाइसेंस निर्दिष्ट अन्वेषण गतिविधियों की अनुमति देता है। यह खनिजों के निष्कर्षण की अनुमति देने वाली खनन पट्टा व्यवस्था के समान नहीं है। महत्त्वपूर्ण खनिज ऐसे संसाधन हैं जिनका आर्थिक या रणनीतिक महत्त्व अधिक होता है और जिनकी आपूर्ति शृंखलाओं में संकेंद्रण या व्यवधान का जोखिम हो सकता है। इनकी उपलब्धता स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और उन्नत विनिर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • MMDR अधिनियम, 1957: प्रमुख कानून; महत्त्वपूर्ण खनिजों के लिए 2023 में संशोधित।
  • केंद्र अधिनियम में सूचीबद्ध महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी करता है।
  • धारा 10BA: महत्त्वपूर्ण और गहराई में स्थित खनिजों के लिए अन्वेषण लाइसेंस।
  • 9वाँ चरण: 20 ब्लॉक; अन्वेषण लाइसेंस का 3रा चरण: 11 ब्लॉक।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • रणनीतिक स्वायत्तता: घरेलू खनिज उपलब्धता बढ़ने से कुछ देशों या क्षेत्रों में केंद्रित अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता कम हो सकती है।
  • औद्योगिक विकास: महत्त्वपूर्ण खनिज बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, विशेष मिश्रधातुओं, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा विनिर्माण के लिए आवश्यक हैं।
  • अन्वेषण संबंधी बाधाएँ: व्यावसायिक विकास के लिए भूवैज्ञानिक जानकारी, तकनीकी निवेश और आर्थिक रूप से व्यवहार्य खनिज प्रसंस्करण क्षमता की आवश्यकता होती है।
  • पर्यावरणीय शासन: खनन गतिविधियों में वृद्धि के साथ भूमि, वनों, जल, समुदायों और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन से संबंधित सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।

आगे की राह

  • भूवैज्ञानिक अन्वेषण और पारदर्शी खनिज नीलामी प्रक्रियाओं को मजबूत किया जाए।
  • घरेलू खनिज प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और खनिज पुनर्प्राप्ति क्षमताओं का विकास किया जाए।
  • पर्यावरणीय आकलन, समुदायों के हितों की सुरक्षा और खनन के बाद पारिस्थितिक पुनर्स्थापन सुनिश्चित किया जाए।

विषयों को आपस में जोड़ें: MMDR अधिनियम + राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन + स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण + औद्योगिक नीति + संसाधन सुरक्षा।

स्रोत: द हिंदू, “खनिज ब्लॉक नीलामी के 9वें चरण में 20 ब्लॉक प्रस्तुत”, 6 नवंबर 2026।

पर्यावरण और पारिस्थितिकी

GS IIIपर्यावरण | वन संरक्षण और वनवासी समुदायों के अधिकार
समाचार 10

अगस्त्यमलाई मामला: सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अस्थायी और गैर-निवासी सेमल की खेती करने वाले लोग वन अधिकार अधिनियम के तहत वनवासी नहीं हैं

संक्षेप में: सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अगस्त्यमलाई वन के भीतर सेमल की खेती करना मात्र किसी व्यक्ति को वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत वनवासी नहीं बनाता।

Silk cotton trees in the misty Agasthyamalai forest
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

6 नवंबर 2026 को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने निर्देश दिया कि केवल वन क्षेत्र में अस्थायी रूप से निवास करने वाले व्यक्तियों तथा पूरी तरह वन क्षेत्र के बाहर रहने वाले व्यक्तियों को मात्र इस आधार पर पारंपरिक वन निवासी नहीं माना जा सकता कि वे वन के भीतर सेमल की खेती करते हैं। यह मामला तमिलनाडु के पश्चिमी घाट के मेघमलाई क्षेत्र और व्यापक अगस्त्यमलाई संरक्षण परिदृश्य में की जा रही खेती से संबंधित है। तमिलनाडु के राजस्व विभाग द्वारा 6 सितंबर को दाखिल हलफनामे में इन 2 समूहों को श्रेणी II और श्रेणी III में वर्गीकृत किया गया था। इन्हें वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 के अंतर्गत विचार किए जाने की प्रक्रिया से बाहर रखा गया।

एक नज़र में
श्रेणी IIअस्थायी निवासी: बाहर रखे गए
श्रेणी IIIवन के बाहर रहने वाले: बाहर रखे गए
वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006अधिकारों के लिए निवास और वन पर निर्भरता आवश्यक
सेमलकेवल खेती करने से वनवासी का दर्जा नहीं मिलता

अवधारणा: वन अधिकार अधिनियम, 2006

अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (FRA) निर्दिष्ट व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता देता है। यह पात्र वनवासी अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों पर लागू होता है। अन्य परंपरागत वन निवासियों के लिए धारा 2(o) के अंतर्गत 13 दिसंबर 2005 से पहले कम से कम 3 पीढ़ियों, अर्थात 75 वर्षों तक मुख्य रूप से वन में निवास और वन पर निर्भरता आवश्यक है। धारा 6 वन अधिकार संबंधी दावों की प्रक्रिया निर्धारित करती है, जो ग्राम सभा से शुरू होकर उपखंड स्तरीय समिति और जिला स्तरीय समिति तक जाती है। अधिकारों की मान्यता के लिए कानूनी प्रावधानों के अनुसार सत्यापन आवश्यक है। केवल वर्तमान कब्जे या खेती का प्रमाण पर्याप्त नहीं है।

Locator map: Megamalai and Agasthyamalai in the southern Western Ghats
दक्षिणी पश्चिमी घाट में मेघमलाई और अगस्त्यमलाई। अवस्थिति दर्शाने वाला मानचित्र, पैमाने के अनुसार नहीं। भारत की सीमाएं आधिकारिक मानचित्रों के अनुसार।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • FRA, 2006: नोडल मंत्रालय जनजातीय कार्य मंत्रालय है।
  • अन्य परंपरागत वन निवासी: 13 दिसंबर 2005 से पहले 3 पीढ़ियों (75 वर्ष) का निवास।
  • ग्राम सभा वन अधिकारों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करती है (धारा 6)।
  • अगस्त्यमलाई जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र: केरल और तमिलनाडु में स्थित दक्षिणी पश्चिमी घाट का हिस्सा। 2016 से यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में शामिल।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • संरक्षण और अधिकार: वन संरक्षण तथा वास्तविक वनवासी समुदायों के कानूनी रूप से मान्यताप्राप्त अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है।
  • कानूनी पात्रता: अस्थायी निवास या खेती से स्वतः वनवासी का दर्जा स्थापित नहीं होता।
  • प्रशासनिक विधिसम्मत प्रक्रिया: व्यक्तिगत दावों की जाँच कानून द्वारा निर्धारित संस्थाओं के माध्यम से की जानी चाहिए।
  • जैवमंडल संरक्षण: मान्यताप्राप्त अधिकारों के अभाव में जैवमंडल क्षेत्र के भीतर व्यावसायिक खेती संरक्षण के उद्देश्यों से टकरा सकती है।

आगे की राह

  • ग्राम सभा के गठन की प्रक्रिया पूरी करें और निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से पात्र दावों पर निर्णय लें।
  • दावों की जाँच करते समय निवास, आजीविका और ऐतिहासिक तथ्यों से संबंधित विश्वसनीय साक्ष्यों का उपयोग करें।
  • वैध वैधानिक अधिकारों से वंचित किए बिना पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और अवैध अतिक्रमणों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें।

विषयों को आपस में जोड़ें: वन अधिकार अधिनियम + जनजातीय कल्याण + ग्राम सभा संस्थाएँ + संरक्षित वन + पर्यावरणीय न्याय।

स्रोत: द हिंदू, “अगस्त्यमलाई संरक्षण मामला: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अस्थायी और गैर-निवासी सेमल (सिल्क कॉटन) उत्पादक वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत संरक्षण के पात्र नहीं हैं”, 7 नवंबर 2026।

GS IIIपर्यावरण | वायु प्रदूषण, शहरी परिवहन और पर्यावरणीय शासन
समाचार 11

दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सर्वोच्च न्यायालय ने वाहनों और निर्माण कार्यों पर बार-बार प्रतिबंध लगाने पर सवाल उठाए

संक्षेप में: सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या केवल अस्थायी प्रतिबंधों से दिल्ली-NCR के प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है। न्यायालय ने दीर्घकालिक समाधानों के महत्त्व पर जोर दिया।

Delhi traffic in winter smog with an anti-smog gun
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

6 नवंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने वाहनों और निर्माण कार्यों पर प्रतिबंधों को दिल्ली के वायु प्रदूषण से निपटने के लिए “पुराने, आजमाए हुए और विफल उपाय” बताया। न्यायालय ने केंद्र सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) से इन उपायों से आगे बढ़कर कोई प्रभावी वैज्ञानिक पद्धति प्रस्तुत करने को कहा। न्यायालय ने कहा कि वाहनों से होने वाला प्रदूषण एक प्रमुख कारक है और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के स्तर तक पहुँच रहा था। इसने फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन और व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। उसी दिन पूरे NCR में श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (GRAP) का चरण III लागू किया गया।

एक नज़र में
“आजमाए हुए और विफल”वाहनों और निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध के संबंध में न्यायालय की टिप्पणी
~400न्यायालय द्वारा उल्लिखित AQI स्तर
GRAP चरण III6 नवंबर को NCR में लागू किया गया
वाहनप्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत बताया गया

अवधारणा: श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (GRAP) और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)

श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (GRAP) एक ऐसा ढाँचा है जिसके अंतर्गत दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता की स्थिति और पूर्वानुमान के अनुसार वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपाय क्रमशः अधिक कठोर किए जाते हैं। इसके क्रियान्वयन का समन्वय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) करता है, जिसकी स्थापना वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत हुई थी। GRAP के अंतर्गत वाहनों, औद्योगिक गतिविधियों, निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल और सड़कों की धूल सहित प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर कार्रवाई की जाती है। चरण III गंभीर वायु गुणवत्ता की श्रेणी में आता है, जिसमें AQI 401-450 होता है। हालाँकि, पूर्वानुमान के आधार पर निवारक उपाय के रूप में इसे पहले भी लागू किया जा सकता है। GRAP आपातकालीन प्रतिक्रिया की व्यवस्था है। यह परिवहन, उत्सर्जन नियंत्रण और शहरी नियोजन में निरंतर सुधारों का विकल्प नहीं है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • CAQM: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत स्थापित।
  • GRAP के 4 चरण हैं। चरण III तब लागू होता है जब AQI 401 से 450 (गंभीर श्रेणी) के बीच हो।
  • 6 नवंबर 2026 को NCR में GRAP चरण III लागू किया गया।
  • अनुच्छेद 21: जीवन के अधिकार में स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार भी शामिल है।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • संरचनात्मक प्रदूषण: वाहनों की अधिक संख्या, औद्योगिक उत्सर्जन, सड़कों की धूल और निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न प्रदूषण के लिए अस्थायी प्रतिबंधों से आगे बढ़कर निरंतर कार्रवाई आवश्यक है।
  • परिवहन नीति: सार्वजनिक परिवहन के पर्याप्त विकल्प न होने पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से कठिनाइयाँ पैदा कर सकते हैं।
  • आजीविका का संरक्षण: निर्माण कार्यों और अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रभावित करते हैं।
  • क्षेत्रीय शासन: दिल्ली के प्रदूषण से निपटने के लिए राष्ट्रीय राजधानी और पड़ोसी राज्यों के बीच समन्वय आवश्यक है।

आगे की राह

  • विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन का विस्तार करें और वाहनों के उत्सर्जन मानकों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करें।
  • मौसमी प्रतिबंधों के साथ वर्षभर धूल नियंत्रण, स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाओं और क्षेत्रीय प्रदूषण प्रबंधन की व्यवस्था लागू करें।
  • पारदर्शी निगरानी और प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों के योगदान का आकलन करने वाले वैज्ञानिक अध्ययनों के माध्यम से उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें।

विषयों को आपस में जोड़ें: अनुच्छेद 21 + CAQM अधिनियम + GRAP + सतत शहरी परिवहन + सहकारी संघवाद + पर्यावरणीय स्वास्थ्य।

स्रोत: द हिंदू, “प्रदूषण रोकने के लिए वाहनों और निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी”, 7 नवंबर 2026। द इंडियन एक्सप्रेस, “प्रदूषण का प्रमुख कारण वाहन, दिल्ली में नियमों की खुली अवहेलना हो रही है: सुप्रीम कोर्ट”, 7 नवंबर 2026।

GS IIIपर्यावरण | तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और जलवायु अनुकूलन क्षमता
समाचार 12

CMFRI के अध्ययन के अनुसार, दशकों तक कमी के बाद 2017 से 2026 के बीच केरलम में मैंग्रोव क्षेत्र बढ़ा

संक्षेप में: उपग्रह चित्रों से पता चलता है कि 2017-2026 के दौरान केरलम में मैंग्रोव वन क्षेत्र बढ़ा है। यह उस राज्य में पुनरुद्धार का संकेत है, जिसने पिछले 5 दशकों में अपने लगभग 90% मैंग्रोव वन खो दिए थे।

A Keralam mangrove forest with a country boat
चित्र केवल प्रतीकात्मक प्रस्तुति के लिए है और AI की सहायता से बनाया गया है।

चर्चा में क्यों

कोच्चि में मत्स्यपालन और सुदूर संवेदन पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CMFRI) के एक अध्ययन ने केरलम के तटीय जिलों में 2017 और 2026 के उपग्रह चित्रों की तुलना की। अध्ययन में इस अवधि के दौरान मैंग्रोव वन क्षेत्र में समग्र वृद्धि पाई गई। हालाँकि, CMFRI के अनुसार, राज्य पिछले 5 दशकों में अपने लगभग 90% मैंग्रोव वन खो चुका था। संस्थान ने 6 नवंबर 2026 को यह जानकारी दी। यह निष्कर्ष समग्र प्रवृत्ति को दर्शाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी जिलों में समान वृद्धि हुई है।

एक नज़र में
2017 बनाम 2026तुलना किए गए उपग्रह चित्र
समग्र वृद्धितटीय जिलों के मैंग्रोव वन क्षेत्र में
~90%पिछले 5 दशकों में नष्ट हुए मैंग्रोव वन
ब्लू कार्बनमैंग्रोव वनस्पतियों और मिट्टी में कार्बन संचित करते हैं

अवधारणा: मैंग्रोव पारिस्थितिकी और ब्लू कार्बन

मैंग्रोव लवण-सहिष्णु वृक्ष और झाड़ियाँ हैं, जो तटीय क्षेत्रों के अंतरज्वारीय वातावरण में उगते हैं, विशेषकर नदीमुखों, संरक्षित तटरेखाओं और डेल्टा क्षेत्रों में। इनके विशेष अनुकूलनों में वायवीय जड़ें, लवण को रोकने या बाहर निकालने की क्षमता तथा जरायुज बीज विकास शामिल हो सकते हैं। मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र तटों को अपरदन और लहरों के प्रभाव से बचाते हैं, जलीय जीवों के प्रारंभिक विकास के लिए अनुकूल आवास उपलब्ध कराकर मत्स्य संसाधनों को सहारा देते हैं और अनेक जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं। ये वनस्पतियों और अवसादों में कार्बन का भंडारण भी करते हैं तथा तटीय ब्लू कार्बन पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देते हैं। सुदूर संवेदन से समय के साथ मैंग्रोव क्षेत्रफल में बदलाव मापने में सहायता मिलती है, जबकि प्रजातियों की संरचना और पारिस्थितिक स्थिति का आकलन करने के लिए स्थल-स्तरीय सत्यापन आवश्यक है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • CMFRI, कोच्चि: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का एक संस्थान।
  • अध्ययन में 2017 और 2026 के उपग्रह चित्रों की तुलना की गई।
  • कुछ मैंग्रोव प्रजातियों में जरायुजता (Vivipary) पाई जाती है। एविसेनिया (Avicennia) में श्वसन मूल (Pneumatophores) और राइजोफोरा (Rhizophora) में अवस्तंभ मूल (Prop Roots) पाई जाती हैं।
  • भारत वन स्थिति रिपोर्ट: पश्चिम बंगाल (सुंदरबन) में भारत का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र है।
मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण और आगे की राह

मुख्य परीक्षा के लिए विश्लेषण

  • तटीय संरक्षण: मैंग्रोव तटीय अपरदन को कम कर सकते हैं तथा लहरों और तूफानी ज्वार के प्रभाव को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं।
  • जैव विविधता का संरक्षण: इनकी जड़ें और संबंधित आवास जलीय जीवों के प्रजनन तथा प्रारंभिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं।
  • जलवायु परिवर्तन का शमन: मैंग्रोव के जैवभार और मिट्टी में संचित कार्बन ब्लू कार्बन भंडार में योगदान देता है।
  • निगरानी की सीमाएँ: मानचित्रों में दर्ज क्षेत्रफल में वृद्धि का अर्थ आवश्यक रूप से जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य या दीर्घकालिक अस्तित्व में सुधार नहीं है।

आगे की राह

  • उपग्रह-आधारित निगरानी को नियमित स्थलीय सर्वेक्षणों और पारिस्थितिक आकलन के साथ जोड़ें।
  • मौजूदा मैंग्रोव आवासों को क्षरण, भूमि भराव द्वारा भूमि परिवर्तन और असंधारणीय भूमि-उपयोग परिवर्तनों से सुरक्षित रखें।
  • तटीय संरक्षण में वैज्ञानिक रूप से उपयुक्त पुनर्स्थापन और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करें।

विषयों को आपस में जोड़ें: मैंग्रोव + ब्लू कार्बन + तटीय जैव विविधता + सुदूर संवेदन + आपदा जोखिम न्यूनीकरण + जलवायु अनुकूलन।

स्रोत: द हिंदू, “पूर्व में गिरावट के बावजूद पिछले दशक में केरलम के मैंग्रोव वन क्षेत्र का विस्तार हुआ: अध्ययन”, 6 नवंबर 2026।

संक्षेप में

  • पराग्वे: बैंक के पतन के कारण राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग: पराग्वे की सीनेट ने यूएनो बैंक के पतन के मामले में 6 नवंबर को राष्ट्रपति सैंटियागो पे냐 के विरुद्ध महाभियोग चलाने के पक्ष में 44 मत दिए। बैंक के पतन के कारण लगभग 30 लाख लोग अपने धन तक पहुँच नहीं बना पा रहे थे। (द हिंदू, 7 नवंबर 2026) स्रोत
  • म्यांमार: अप्रैल 2027 में उपचुनाव: म्यांमार के संघीय निर्वाचन आयोग ने 55 निर्वाचन क्षेत्रों में 4 अप्रैल 2027 को उपचुनाव कराने की घोषणा की। (म्यांमार इंटरनेशनल टीवी, 6 नवंबर 2026) स्रोत
  • पासपोर्ट और वीज़ा संबंधी छूट पर स्पष्टीकरण: नवंबर 2026 के एक संशोधन के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न या उसके भय के कारण 31 दिसंबर 2024 तक भारत में प्रवेश करने वाले पात्र हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई प्रवासियों को पासपोर्ट तथा यात्रा दस्तावेज संबंधी आवश्यकताओं से छूट दी गई है। हालांकि, भारत में आगे रहने के लिए वैध वीजा अब भी आवश्यक है। (आकाशवाणी समाचार, 6 नवंबर 2026) स्रोत
  • गुजरात एनर्जी के साथ ADNOC का LNG समझौता: संयुक्त अरब अमीरात की अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) ने 2028 से अगले 10 वर्षों में भारत की गुजरात एनर्जी को 40 लाख टन तक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति करने पर सहमति व्यक्त की। (ADNOC, 6 नवंबर 2026) स्रोत
  • प्रारंभिक परीक्षा के लिए विज्ञान: टोकामक: टोकामक (Tokamak) में अत्यधिक गर्म प्लाज्मा को परमाणु संलयन अनुसंधान के लिए डोनट के आकार के कक्ष के भीतर सीमित रखने हेतु शक्तिशाली टोरोइडल और पोलोइडल चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग किया जाता है। फ्रांस में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय ताप-नाभिकीय प्रायोगिक रिएक्टर (ITER) इस प्रकार का सबसे बड़ा उपकरण होगा। (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी, IAEA) स्रोत
  • CBSE बोर्ड परीक्षाएँ 16 फरवरी 2027 से: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाएँ 16 फरवरी 2027 से शुरू होंगी। (आकाशवाणी समाचार, 6 नवंबर 2026) स्रोत

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास: 5 प्रश्न

उत्तर और व्याख्या देखने के लिए एक विकल्प चुनें। सभी 5 प्रश्नों के उत्तर देने के बाद आपका स्कोर दिखाई देगा।

प्रश्न 1 / 5
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण और क्रीमी लेयर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. OBC में क्रीमी लेयर की पहचान के मानदंड सितंबर 1993 के एक कार्यालय ज्ञापन में निर्धारित किए गए थे। 2. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्रीमी लेयर संबंधी उसका मार्च 2026 का निर्णय लंबित सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 के सेवा आवंटन पर लागू होगा। 3. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मार्च 2026 से पहले की गई सभी नियुक्तियों को पुनः खोलकर क्रीमी लेयर की स्थिति का फिर से आकलन किया जाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर: (a) 1993 का कार्यालय ज्ञापन (OM) क्रीमी लेयर के मानदंड निर्धारित करता है। न्यायालय ने अपने मार्च के निर्णय को लंबित CSE 2025 के सेवा आवंटन पर लागू किया। न्यायालय ने कहा कि यह निर्णय अपने आप में पहले ही पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं या नियुक्तियों को पुनः खोलने का आधार नहीं बनेगा।
प्रश्न 2 / 5
वन अधिकार अधिनियम, 2006 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अन्य परंपरागत वन निवासियों को यह प्रमाणित करना आवश्यक है कि वे 13 दिसंबर 2005 से पहले 3 पीढ़ियों से मुख्य रूप से वन भूमि पर निवास कर रहे थे। 2. ग्राम सभा वन अधिकारों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करती है। 3. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय इस अधिनियम का नोडल मंत्रालय है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर: (b) एक पीढ़ी का अर्थ 25 वर्ष है। इसलिए अन्य परंपरागत वन निवासियों के लिए 75 वर्षों के निवास और वन पर निर्भरता की शर्त है। ग्राम सभा अधिकारों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करती है। इस अधिनियम का नोडल मंत्रालय जनजातीय कार्य मंत्रालय है, न कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)।
प्रश्न 3 / 5
चावल के भंडार से संबंधित हालिया उपायों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संबंधित संस्थाओं को प्रत्येक शुक्रवार खाद्य भंडार पोर्टल पर चावल और धान के अपने भंडार की घोषणा करना अनिवार्य है। 2. केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चावल के भंडारण की एकसमान सीमाएँ लागू की हैं। 3. खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू) का उपयोग केंद्रीय भंडार से खाद्यान्न बाजार में उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर: (c) साप्ताहिक भंडार घोषणा अनिवार्य है। खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू), OMSS (D), के माध्यम से केंद्रीय भंडार से खाद्यान्न बाजार में उपलब्ध कराया जाता है। इसके तहत 2026-27 के लिए चावल की बिक्री का लक्ष्य दोगुना करके 50 लाख टन किया गया है। भंडारण सीमाएँ लागू करने की अनुमति केवल 5 दक्षिणी राज्यों में दी गई थी। इन्हें पूरे भारत में एकसमान रूप से लागू नहीं किया गया था।
प्रश्न 4 / 5
भारत के जैव ईंधन कार्यक्रमों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. E20 का अर्थ 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल है। 2. संपीडित बायोगैस मिश्रण की अनिवार्यता परिवहन में प्रयुक्त संपीडित प्राकृतिक गैस (CNG) और घरेलू पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस (PNG) पर लागू होती है। 3. वर्ष 2026-27 के लिए संपीडित बायोगैस मिश्रण का लक्ष्य 5% है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर: (d) E20 का अर्थ 20% एथेनॉल मिश्रण है। संपीडित बायोगैस (CBG) मिश्रण परिवहन के लिए CNG और घरेलू उपयोग के लिए PNG पर लागू होता है। CBG मिश्रण का लक्ष्य 2026-27 के लिए 3%, 2027-28 के लिए 4% और 2028-29 के लिए 5% है।
प्रश्न 5 / 5
होर्मुज़ जलडमरूमध्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। 2. यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है। 3. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर: (b) होर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान का मुसंदम प्रायद्वीप स्थित है। लाल सागर को अदन की खाड़ी से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य जोड़ता है।
आपका स्कोर / 5
हर संस्करण में एक नई प्रश्नोत्तरी जोड़ी जाती है।
अन्य संस्करण

मुख्य परीक्षा अभ्यास

GS पेपर II | 15 अंक | 250 शब्द

GS II | सामाजिक न्याय | कमजोर वर्ग और शासन “विशिष्ट वैधानिक प्रतिबंध और न्यायपालिका के बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद, सीवर की खतरनाक सफाई के कारण भारत में लोगों की जान जाना जारी है।” सीवर की खतरनाक सफाई की रोकथाम में कानूनी संरक्षण और उसके क्रियान्वयन के बीच मौजूद कमियों का परीक्षण कीजिए। सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा, गरिमा और पुनर्वास सुनिश्चित करने के उपाय सुझाइए।

उत्तर की रूपरेखा देखें

प्रस्तावना

हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 का उद्देश्य हाथ से मैला उठाने की प्रथा और सीवर की खतरनाक सफाई को समाप्त करना है। फिर भी संसद में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, 2021-26 के दौरान 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सीवर तथा सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के दौरान 332 लोगों की मृत्यु हुई।

मुख्य भाग 1: संवैधानिक और कानूनी ढाँचा

  • अनुच्छेद 17, 21 और 23 क्रमशः अस्पृश्यता, गरिमा के लिए खतरों और बलात् श्रम के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करते हैं।
  • 2013 के अधिनियम की धारा 7 सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई को प्रतिबंधित करती है।
  • धारा 33 स्थानीय प्राधिकरणों और एजेंसियों को सफाई के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी का उपयोग करने का निर्देश देती है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2023 के निर्णय में सीवर सफाई के दौरान मृत्यु होने पर ₹30 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया।

मुख्य भाग 2: क्रियान्वयन में कमियाँ

  • पर्याप्त मशीनीकरण का अभाव खतरनाक मानवीय श्रम पर निर्भरता पैदा कर सकता है।
  • ठेके और उपठेके की व्यवस्था जवाबदेही निर्धारित करना जटिल बनाती है।
  • घटनाओं की रिपोर्टिंग और कानून के प्रवर्तन में कमियाँ दंड के भय से उत्पन्न निवारक प्रभाव को कमजोर कर सकती हैं।
  • श्रमिकों के पास सुरक्षित वैकल्पिक रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हो सकते हैं।

मुख्य भाग 3: सामाजिक न्याय का आयाम

  • खतरनाक सफाई कार्य का संबंध लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक बहिष्करण और व्यवसाय संबंधी असमान अवसरों से है।
  • सुरक्षा उपायों का लाभ संविदा और अस्थायी श्रमिकों तक भी पहुँचना चाहिए।
  • केवल मुआवजा पुनर्वास, आजीविका सुरक्षा और शैक्षिक अवसरों का विकल्प नहीं हो सकता।

मुख्य भाग 4: आवश्यक सुधार

  • मशीनों द्वारा सफाई अनिवार्य करें और सत्यापन योग्य सुरक्षा प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
  • नगर निकायों, ठेकेदारों और पर्यवेक्षण करने वाले प्राधिकरणों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित करें।
  • घटनाओं का पारदर्शी रिकॉर्ड बनाए रखें और समय पर मुआवजा सुनिश्चित करें।
  • कौशल विकास, पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार के अवसरों का विस्तार करें।

निष्कर्ष

सीवर की खतरनाक सफाई समाप्त करने के लिए केवल वैधानिक प्रतिबंध पर्याप्त नहीं है। सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी प्रवर्तन, मशीनीकरण, संस्थागत जवाबदेही और गरिमापूर्ण आजीविका के अवसरों को एक साथ सुनिश्चित करना आवश्यक है।

मुख्य परीक्षा के लिए एक महत्त्वपूर्ण सुझाव

हाथ से मैला उठाने की प्रथा और सीवर की खतरनाक सफाई को कानूनी दृष्टि से एकसमान श्रेणियाँ न मानें। पहले 2013 के अधिनियम के तहत इनकी अलग-अलग परिभाषाएँ स्पष्ट करें। इसके बाद दोनों को गरिमा, सुरक्षा, पुनर्वास और जवाबदेही से जोड़ें।

मुख्य परीक्षा 2026 के परिणाम के बाद

मुख्य परीक्षा 2026 में मेरे अंक कहाँ कम रह गए?

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चित्रों के बारे में: करंट कैनवस में प्रयुक्त तस्वीरें और चित्र केवल उदाहरण के उद्देश्य से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा तैयार किए गए हैं। ये वर्णित घटनाओं की वास्तविक समाचार तस्वीरें नहीं हैं।

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